शुक्रवार, 21 जून 2013

इंसानीयत - व्यंग्य

मैं उस दिन बाज़ार से लौट रहा था. सामने से एक 8 -10 बर्ष का लड़का एक हाथ का ठेला खींचता हुआ चला आ रहा था.ढलान होने के कारण ठेले की गति कुछ अधिक थी, अतः काफी बचाने पर भी वह एक सज्जन की साइकिल से थोडा सा टकरा गया. उन सज्जन ने उस लड़के को 2 थप्पड़ रसीद किये और चलते बने. राह चलते लोगों में से भी, किसी ने उसे बचाने कोशिश नहीं की| थोड़ी दूर पर एक ताँगा एक कुत्ते के पैर को कुचलता हुआ निकल गया, कुत्ता जोर से चीखने लगा, आसपास से 2 कुत्ते आकर उसके पास जमा हो गये और उसका पैर चाटने लगे।

गुरुवार, 13 जून 2013

हाजिर जवाबी के फायेदे - लघुकथा


एक वृद्ध भिखारी दिनभर घूमकर खूब सारा  अनाज इक्कठा करता।  लोगों को वह उसकी जरुरत से अधिक लगता था।  एक दिन लोगो ने उससे पूछा- इतने सारे अनाज का क्या करते हो ? वह बोला - मुझे चार सेर अनाज नित्य मिलता है।  एक सेर मैं एक राक्षसी को देता हूँ।  एक सेर अनाज उधार देता हूँ।  एक सेर बहते पानी में बहा देता हूँ।  और एक सेर से मंदिर के देवता को भोग लगाता हूँ। लोगो को  कुछ समझ में नहीं आया।  वे उसे पाखंडी समझकर राजा  के पास  ले गए । राजा से वह बोला- राक्षसी मेरी पत्नी है , जो  केवल खाना , पहनना और सोना जानती है। किन्तु उसे खिलाना मेरा कर्तव्य हैं।  इसलिए एक सेर अनाज उसे देता है।  उधार मैं अपने पुत्र को देता हूँ।  वह छोटा है इसलिए उसका पेट भरना मेरा दाय्तित्व हैं।  जब मैं बूढा हो  जाऊँगा और वह जवान हो जाएगा तो मुझे कमाकर  खिलायेगा। इसे मैं उधार देना कहता हूँ।  मेरी बेटी जब बड़ी होगी तो अपने पति के घर चली जाएगी।  उसे खिलाने का मतलब बहते पानी में अनाज फेंकना ही है, किन्तु वह मेरा धर्म भी है।  मेरा यह शरीर मंदिर है और उसमे बसने वाले प्राण मंदिर के देवता है।  यदि इन्हें भोग न लगाऊ तो मेरे परिवार का गुजर बसर कैसे हो ?

राजा भिखारी की हाजिर जवाबी से प्रसन्न हुआ और कहा - तुम तो पंडित जान पड़ते हो।  आज से तुम्हें अपना विशेष सलाहकार नियुक्त करता हु। 
इस प्रकार भिखारी ने अपनी चतुराई से अपनी जीवन की कायापलट कर दी।  

हाजिर जवाबी एक ऐसा गुण है जो कोगो को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।  यदि इसे अपने स्वभाव का  अंग बना ले तो अनेक अवसरों पर सफलता मिलती है।